Saturday, 9 March 2013

उफ्फ... ये मकान मालिक...


सुबह से लेकर शाम तक..शाम से लेकर रात तक…रात से लेकर सुबह तक…सुबह से फिर शाम तक…..आगे कि लाईन वह नहीं है जो आप सोच रहे हैं….
महिनें में कई दिन ऐसे होते है…जब सुबह मकान मालिक से लड़ाई होती है….शाम को हमें बिजली से मुक्त कर अपने छोटे लड़के से लालटेन भेजवाते है … ना जाने कौन सी करामात करके रात को नल से पानी ही गायब कर देते हैं …..इतने नखरे झेलने पड़ते है मक्कान मालिक के…
.एक दिन अप्पन को गुस्सा आ गया…और पूछ ही लिया…क्यों यार अंकल जी क्यों माता-पिता की लाडलियों पर आप जुल्लम कर रहे हैं आप जी….तो कहनें लगे सुबह इत्ते देर से उठती हो तुम लोग….फिर दांत माजने में इत्ते टेम लगते है…तब तक तुममें से कोई फटाफट उत्तर देकर मिस इंडिया का ताज लेकर दरवज्जे पर आ जाये…
तब अप्पन ने कहा..यार अंकल जी आपके छठवीं क्लास के सुपुत्र अप्पन लोग के ही गुसलखाने में घुस जाते है…और उनकी कमाल की बाथरुम सिंगिंग देखकर हम तो उनपर तरस खाते हैं कि चलो बाप ने बच्चे को अपने बाथरुम में सिंगिंग का मौका नहीं दिया तो का हुआ..आखिर हम पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी है….हम नहीं पहचानेंगे छोटे मालिक के टैलेंट को तो आखिर कौन पहचानेगा…इसलिए जब तक वह हमारे गुसलखानें में प्रैक्टिस करते हैं…तब तक हम बाहर दांत माजते हैं….
मक्कान मालिक बोले…डीग है डीग है…और अपने दरबे में घुस गए….
वैसे हर महिने तो हम कमरे का किराया टाइम पर ही देते हैं…..लेकिन साली इस फरवरी नें हमें बहुत दुख दिया….इस महिनें में 28 दिन होने के कारण हमें दो दिन का चूना लगा….मकान मालिक के घर में आल आउट का लिक्विड खतम हुआ और वह 26 तारीख से ही किराए के लिए भनभनाने लगे….और फिर शुरु हो गया…सुबह से लेकर शाम तक….शाम से लेकर……….
अप्पन नें कहा यार अंकल जी हम किराया 30 को देंगे…
उन्होंने कहा…..ई अपरइल नाही ई फर्रवरी बा….
अप्पन ने कहा…..ठीक है गुरुदेव…हमे ज्ञान प्राप्त हो गया कि ई फर्रवरी है….दू दिन बाद हम किराया दे देंगे….
अंकल जी बिना कुछ बोले ऐसे संतोषी बनकर चुपचाप चले गए..जैसे नवरात्र शुरु हो गया हो…..लेकिन शाम को कमरे के बिजली के बोर्ड का फ्यूज उड़ा मिला……और इस बार "हमने" शुरु किया…...सुबह से लेकर शाम तक
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