Sunday, 6 January 2013

बलात्कार की बतकही...

बनारस की एक सहेली के घर से बुलावा था। मैं 31 दिसम्बर को बनारस जाने के लिए प्रयाग स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रही थी…ट्रेन लेट थी…मैं वहीं प्लेटफार्म पर बैठ गई..तभी कुछ लड़के दौड़ते-हांफते हुए आये…और स्टेशन पर खड़े होकर एक दूसरे को डांटने लगे…

सुनने में बात पूरी और अच्छे से समझ में आ रही थी…कि वे लोग किसी लड़की को छेड़े थे और पुलिस उन्हें दौड़ायी थी….उनमें से एक लड़का जोर से अपनें दोस्तों पर चिल्ला रहा था…और कह रहा था.."साल्ले मना किया था तुझे न….अभी दिल्ली वाली लड़की के साथ बलात्कार हुआ है और सुना है मर भी गई है वो…कुछ दिन में सब शान्त हो जावेगा साल्ले तब तक के लिेए शरीफ बन जा बेटा आयी बात समझ में….और ये पुलिस भोंसड़ी के ना अप्पन का पहले कुछ उखाड़ी है ना ही आज उखाड़ती…अगर लड़की वाला बलात्कार का मामला पूरे देशवा में ना फैला होता..ये पुलिस वाले साले खुद रोज लड़कियां छेड़ते हैं और भोंसड़ी के आज हमीं को दौड़ाये हैं"….

घंटे भर इंतजार के बाद ट्रेन आयी...मैं ट्रेन में बैठ गई…ट्रेन में अधिकतर यात्रियों के बीच यही चर्चो चल रही थी….दिल्ली में लड़की के साथ बलात्कार हुआ..फिर वह मर गई….हर तरफ हर जगह बलात्कार वाली बातें सुनकर ऐसा लग रहा था..कि लोग कितने चिंतित हैं…मानों इस बलात्कार के बाद लोग क्षण भर में जागरुक हो गए हों…और ऐसी घटनाएं आगे अब कभी ना होंगी...

भदोही स्टेशन पर ट्रेन रुकी काफी...यात्री उतर चुके थे…मैं उस बोगी में अकेली लड़की बची थी…बाकी  की कुछ बुजुर्ग महिलाएं थी…..बाकी के 6-7 अंकल-दादा टाईप के लोग बैठे थे…उनके बीच एक साधु बैठा था..जो जयपुर का रहनें वाला था…..ट्रेन थोड़ी खाली हुई तो इन लोगों की बतकही थोड़ी जोर की शुरु हुई…. 
 उनमें से एक आदमी नें कहा…दिल्ली बस में लड़की के साथ जो बलात्कार हुआ उसमें लड़की की गलती थी…ब्वायफ्रेंड को लेकर आधी रात को घूम रही थी…और इससे भी ज्यादा गलती इनके मां-बाप की है…चुपचाप अपनें पास रख कर पढ़ाना चाहिए था तो भेज दिए बाहर पढ़नें को….अब भुगतें…लड़की जान से हाथ धोकर गई…..दूसरे महाशय बोले हमको तो लग रहा है..सबसे ज्यादा गलती उस बस के ड्राइवर की है…जब लड़की के साथ बलात्कार हो रहा था तो उसे बस को किसी थाने पर ले जाकर खड़ा कर  देना चाहिए था….फिर कोई टप से बीच में बोला…अरे लड़किया के 100 नंबर पर फोन करे के चाहत रहल ह…तुरंत पुलिस आवत….लड़की खुद् सौंप दी अपनें को…….कपड़ा भी तो ये लोग उत्तेजक ही पहनती हैं…जब एक बार गाना निकला था…चोली के पीछे क्या है…तो उस समय बनारस में इस गानें को लेकर कितना बवाल हुआ था…लेकिन अब की लड़कियां वही कपड़े खुद पहन रहीं हैं…..अभी उनके बीच बैठे साधु का बोलना बाकी रह गया था….बोले..रावण भी सीता के चुरा के ले गयल रहल…स्त्री के साथ छेड़छाड़ की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है..ये बिल्कुल बंद नहीं होगी…उस बाबा जी की बातें सुनने में ऐसी लग रहीं थी…मानो बाबा कोई बात नहीं कह रहें हैं..बल्कि कोई प्रतिज्ञा कर रहें हैं कि छेड़खानी कभी बन्द नहीं करेंगे…
मन उकता गया था...उनकी ऐसी बातें सुनकर.....ट्रेन बनारस स्टेशन पर आ गई थी....और मैं उतर गई...

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