Monday, 8 August 2016

चिंता खा नहीं रही काट रही है...

कल मेरी रूम मेट बातोंबातों में बोली-काश बचपन के दिन जल्दी न बीते होते, अच्छा होता कि हम बड़े ही न हुए होते। लेकिन अगर बड़े न होते तो मां-बाप को उसकी भी एक अलग ही चिंता हो जाती।

मां-बाप को बच्चों की चिंता तो हमेशा लगी रहती है। पड़ोसी के बच्चे को नौकरी मिल जाए तो मां को अपने बच्चे की चिंता होने लगती है। पापा के दोस्त का बेटा विदेश चला जाए तो पापा को अपने बच्चे की चिंता होने लगती है। अपना दोस्त अपनी पहली सैलरी से अपने घरवालों के लिए नए कपड़े खरीद कर लाता है तब अपनी मां के सपने जैसे चकनाचूर होकर उनकी आंखों से बहने लगते हैं। आप सिर्फ मैगी या चाय बनाना जानती हैं जबकि पड़ोसी की बेटी छप्पन भोग तैयार करके रख देती है तब मां के दिल में आपके लिए टीश उठती है। जाड़े के दिनों में आप मां से स्वेटर बुनने की फरमाइश करती हैं और आपके बगल की रीना, श्वेता अपने लिए हॉफ औऱ फुल बाजू के धारीदार स्वेटर के अलावा अपने भाई के बेटे के लिए दो जोड़ी रंग-बिरंगे मोजे बुन देती है तो मां को आप गुड़-गोबर से ज्यादा कुछ नहीं लगतीं। उनके चिंता करने की एक वजह होती है भला।

आपको अट्ठाइस की उम्र तक पढ़ा रहे हैं वो इसके बाद भी आप अपने बाल सफेद कर बिना नौकरी के उनके सामने हाजिर हों तो उसकी एक अलग चिंता होती है...शायद चिंता नहीं आक्रोश जैसा कुछ होता है। इसके बाद वे आपके पढ़ाई का खर्च उठाने की हालत में नहीं होते हैं। अगर आप लड़का हैं तो खुद कैसे भी कमाइए या शादी कर लीजिए..बहू को मां-बाप के पास छोड़कर दहेज के पैसे लेकर शहर जाइए और पढ़ाई कीजिए। अगर आप लड़की हैं तो..उनके कहने से पहले ही शादी के लिए हां बोल दीजिए..भलाई इसी में है। आपको आगे पढ़ाने की उनकी कूबत नहीं है उनमें...आगे पढ़ाएंगे तो जमा पैसे खिसकते ही जाएंगे...फिर आपकी शादी के लिए दहेज के पैसे क्या वे भीख मांगकर जुटाएंगे।

आपने शादी के लिए हां बोल दिया तो इसकी अलग ही चिंता। पिता के पैर में छाले पड़ जाते हैं आपके लिए योग्य वर ढूंढने में। आजकल वधू ढूंढने में भी पिता को मशक्कत करनी पड़ती है। फिर उनकी पसंद पर आपने छूरियां चला दी तो उसकी एक अलग चिंता। यदि आप लड़का हैं तो आप पर दबाव बनाया जाएगा कि कुछ करते-धरते तो हो नहीं लड़की ऐश्वर्या राय कहां से मिलेगी। अगर आप लड़की हैं तो आपको काली,  सांवली, छोटी आदि बताकर कहा जाएगा कि सपनों वाला राजकुमार ऐसी लड़कियों को नहीं मिलता..जो दूल्हा ढूंढा है चुपचाप उसी से कर लो शादी। एक मिनट के लिए आप सदमे में आ जाएंगे कि ये आपही के मां-बाप है न। 

आप सदमे से उबरे भी नहीं रहेंगे कि मां विलाप करते हुए कहेंगी..कर लो बेटी शादी...पापा कहां से ढूंढेंगे तुम्हारे मन-मुताबिक लड़का। अपनी हैसियत भी तो नहीं है। कहां से दे पाएंगे इतना दहेज। फिर सरकारी नौकरी के नाम पर आपको एक सरकारी सफाईकर्मी या चपरासी लड़के के साथ जीवन भर के लिए बांधने का फैसला कर लिया जाता है।

अंततः सीन थोड़ा जुल्मी हो जाता है। आपके सामने आपकी अपनी पिछली जिंदगी का फ्लैशबैक चलने लगता है। जब आप किसी शहर के मैक-डी में बैठकर बर्गर खा रहे थे साथ में फ्री वाई-फाई पाकर नेट सर्फिंग कर रहे थे। लड़की किसी बुद्धजीवी लड़के का सपना देख रही थी तो लड़का मिल्की व्हाइट और नौकरी करने वाली लड़की का।

वैसे चार्ली चैपलिन कब के कह गए हैं कि जिंदगी क्लोज-अप में ट्रेजडी है..इसलिए आप इसे लांग शॉट में देखिए। कल को आप कमाने लगेंगे तब भी मां-बाप की चिंता उतनी ही रहेगी कि आपकी तनख्वाह फलाने के लड़के से कम है...फलाने का लड़का अपनी मां के लिए हर हफ्ते साड़ी खरीदकर देता है जबकि आप सिर्फ होली-दीवाली। आप अभी से गंजे हो रहे हैं..फलाने का लड़का तो तीस की उम्र में भी बीस जैसा दिख रहा है। नहीं खत्म होने वाली हैं ये परेशानियां।  
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