Thursday, 2 February 2017

शादी के डर से बड़ा कोई डर नहीं था....



आधी रात बाद किसी के सुबक-सुबक कर रोने की आवाज आ रही थी। मैं उठकर बैठ गई। कमरे की लाइट जलाकर देखी तो मेरी नई रूम मेट तकिए से मुंह छुपाये रो रही थी। मैंने उसे हिलाया और पूछा कि क्यों रो रही हो। वह कुछ नहीं बोली। बार-बार पूछने के बाद भी वह कुछ नहीं बोली। मैं काफी देर तक उसके कंधे पर अपना हाथ रखकर बैठी रही। अंत में उसने अपना रोना बंद करते हुए मुझे सो जाने को कहा, मैं वापस आकर सो गई।

कुछ दिन पहले ही हॉस्टल के मेरे कमरे में नई रूम मेट आयी। उस दिन अपना परिचय देते हुए उसने सिर्फ इतना बताया कि मुखर्जी नगर से सिविल सर्विस की कोचिंग पूरी करने के बाद वह इलाहाबाद रूम पर बैठकर तैयारी करने आयी है। सुल्तानपुर की रहने वाली है।

बात थोड़ी हजम नहीं हो रही थी...लोग इलाहाबाद से दिल्ली जाते हैं और वो दिल्ली से इलाहाबाद। मैं यह बात सोच ही रही थी कि वह फिर बोली- मैं इलाहाबाद एक परीक्षा देने आयी थी..यह शहर मुझे जम गया तो मैंने यहीं से तैयारी करने की सोच ली। अब शायद बात मुझे हजम हो गई थी।
हफ्ते भर तक सिर्फ इतना ही जानती थी मैं उसे। वह मार्केट से एक पैकेट दलिया और आधा किलो टमाटर, कुछ मिर्च खरीदकर लायी थी। दोपहर में दलिया बनाती और रात के खाने में भी उसे ही खाती। आधा किलो टमाटर और एक पैकेट दलिया के अलावा उसने अगले बारह दिनों में कुछ नहीं खरीदा। 

हॉस्टल की बाकी लड़कियों से उसका कोई लेना देना नहीं था। वह किसी से बात नहीं करती और अपने आप में ही रहती। पंद्रह घंटे पढ़ाई करती, पांच घंटे सोती...और बाकी के बचे समय में नहाना, खाना और अन्य काम करती। यही उसका शेड्यूल था।

अगली सुबह मैंने उससे रात में रोने की वजह पूछी। वह कुछ नहीं बोली..एक बार मेरी तरफ देखी और अपनी नजरें नीचे झुका ली। फिर मैंने दोबारा पूछने की कोशिश नहीं की। शाम को उसने बताया कि उसने पीसीएस मेंस का एक्जाम दिया है। रिजल्ट आने वाला है। जैसे बाकी लोगों को रिजल्ट आने से पहले डर लगता है, उसे भी लगना चाहिए लेकिन नहीं लग रहा। उसे कोई और डर खाए जा रहा है। शादी के लिए लड़के वाले उसे देखकर गए हैं। वह उन्हें पसंद भी आ गई हैं। अगर शादी तय हो गई तो वह कुछ नहीं कर पाएगी। घर वालों को समझाने के लिए अब कोई शब्द, कोई वाक्य कोई बात नहीं बची थी।

वह नौकरी से पहले शादी नहीं करना चाहती थी। उसके संघर्ष की भी एक दास्तां थी। वह उसमें किसी और को शामिल नहीं करना चाहती थी। वह अपने पैसे को एन्ज्वाय करना चाहती थी अकेले। वह अपने मेहनत का सुखद परिणाम आने तक अकेले रहना चाहती थी। शादी के भय से वह हर रात पढ़ाई करके जब सोने के लिए लेटती तो रोते-रोते सो जाती।

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